योग की चाह रची, तो निरोग हुई जिन्दगी लजी व्यायाम करने, ती दीप हुई जिन्दगी ।" आज तेज रफ्तार जीवन भोली के कारण अनेक ऐसपल औ हमारी जीवन गति पर लगा देते है। हमारे चारों ओर वातावरण में निक ऐसे कारण दियभान है जो तनाव, थकान त्या मानसिक अवसाद कीजन्म देते हैं। जिससे हमारीजीवन शैली अस्तव्यस्तंही जाती है। ऐसे में जीवन की उर्जावान एवं निरो…
Read moreभारत का कण-कण ललकारे (२६) दुर्दम्य दमन का चक्र चला, जो युग-युग से चलता आया । शोषित पीड़ित मानवता को, दानव सदैव छलता आया । कितने युवकों को तड़पाए, नहला कर हिम-जल धारा में | कितने लालों के प्राण लिए, काली अंधियारी कारा में || जब राष्ट्रीय-अस्मिता और गौरव पर प्रबल प्रहार हुए। तब देव-शक्तियाँ जाग उठीं, छिड़ गए समर, संहार हुए। इस राष्ट्…
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